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सिनेमाई संगीत में प्रामाणिकता की तलाश

“हिन्दी सिनेमा के संगीत से मेलोडी चली गई. आजकल की फ़िल्मों के गीत वाहियात होते जा रहे हैं. पहले के गीतों की तरह फ़िल्म से अलग वे याद भी नहीं रहते. जैसे उनका जीवन फ़िल्म के भीतर ही रह गया है, बाहर नहीं.” पिछले दिनों सिनेमाई संगीत से जुड़ी कुछ चर्चाओं ...

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March 12, 2012

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वीडियोवाला

“हमारी फ़िल्में यहाँ आएंगी. जब भी हम अच्छी फ़िल्में बनायेंगे, वो आएंगी. ऐसा नहीं है कि हमारे मुल्क में अच्छे फ़िल्मकार नहीं हैं. असली वजह है निर्माताओं का न होना. मान लीजिए मैं कोई फ़िल्म बनाना चाहता हूँ. लेकिन योजना बनते ही बहुत सारी चिंताएं उसके साथ पीछे-पीछे चली ...

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July 11, 2011

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हिन्दी सिनेमा में प्रेम की अजीब दास्तान

हिन्दी सिनेमा के पुराने पन्ने पलटते हुए कई बार मुझे ताज्जुब होता है कि क्या यही वो कहानियाँ थीं जिनके बलबूते हमारे इश्क़ पीढ़ियों परवान चढ़े? हिन्दी सिनेमा अपवादों को छोड़कर खासा यथास्थितिवादी रहा है और ऐसे में प्रेम जैसे स्वभाव से यथास्थितिवाद विरोधी मनोभाव का इसके मूल दर्शन के ...

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February 3, 2011

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अभिनेता के अवसान का साल

पिछला साल खत्म हुआ था ’थ्री ईडियट्स’ के साथ, जिसे इस साल भी लगातार हिन्दी सिनेमा की सबसे ’कमाऊ पूत’ के रूप में याद किया जाता रहा. इस साल आई ’दबंग’ से लेकर ’राजनीति’ तक हर बड़ी हिट की तुलना ’थ्री ईडियट्स’ के कमाई के आंकड़ों से की जाती रही. ...

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January 5, 2011

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2010 : पहले तीन नाम

दुस्साहस कल-कल सच्चाई

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December 31, 2010

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मनोरंजन का बदला चेहरा

पिछले हफ़्ते रामकुमार ने कहा कि बीते दशक में बदलते हिन्दुस्तानी समाज की विविध धाराओं को एक अंक में समेटने की कोशिश है. आप पिछले दशक के सिनेमा पर टिप्पणी लिखें. ख़्याल मज़ेदार था. लिखा हुआ आज की पत्रिका के रविवारीय परिशिष्ठ में प्रकाशित हुआ है. मज़ेदार बात ...

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December 26, 2010

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The ugliness of the indian male : Udaan

अगर आप भी मेरी तरह ’तहलका’ के नियमित पाठक हैं तो आपने पिछले दिनों में ’स्पैसीमैन हंटिंग : ए सीरीज़ ऑन इंडियन मैन’ नाम की उस सीरीज़ पर ज़रूर गौर किया होगा जो हर दो-तीन हफ़्ते के अंतर से आती है और किसी ख़ास इलाके/संस्कृति से जुड़े हिन्दुस्तानी मर्द का ...

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July 23, 2010

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देवदास को आईना दिखाती चंदा और पारो : साल दो हज़ार नौ में हिन्दी सिनेमा

महीना था जनवरी का और तारीख़ थी उनत्तीस. ’तहलका’ से मेरे पास फ़ोन आया. तक़रीबन एक हफ़्ता पहले मैंने उन्हें अपने ब्लॉग का यूआरएल मेल किया था. ’आप हमारे लिए सिनेमा पर लिखें’. ’क्या’ के जवाब में तय हुआ कि कल शुक्रवार है, देखें कौनसी फ़िल्म प्रदर्शित होने वाली है. ...

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January 20, 2010

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“मैं खामोशी की मौत नहीं मरना चाहता!” ~पीयूष मिश्रा.

पीयूष मिश्रा से मेरी मुलाकात भी अनुराग कश्यप की वजह से हुई. पृथ्वी थियेटर पर अनुराग निर्मित पहला नाटक 'स्केलेटन वुमन' था और पीयूष वहीं बाहर दिख गए. मैंने थोड़ा जोश में आकर पूछ लिया कि आपका इंटरव्यू कर सकता हूँ एक हिंदी ब्लॉग के लिए - साहित्य, राजनीति और ...

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June 3, 2009