“मैं खामोशी की मौत नहीं मरना चाहता!” ~पीयूष मिश्रा.
पीयूष मिश्रा से मेरी मुलाकात भी अनुराग कश्यप की वजह से हुई. पृथ्वी थियेटर पर अनुराग निर्मित पहला नाटक 'स्केलेटन वुमन' था और पीयूष वहीं बाहर दिख गए. मैंने थोड़ा जोश में आकर पूछ लिया कि आपका इंटरव्यू कर सकता हूँ एक हिंदी ब्लॉग के लिए - साहित्य, राजनीति और ...
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June 3, 2009
ऊधो मोहि ब्रज बिसरत नाहीं
मेरे दोस्त समझ जायेंगे कि मैं आजकल 'घर' को इतना क्यों याद करता हूँ. 'घर' के छूटने का अहसास बहुत तीखा है. दोस्त मेरे भीतर कुछ अजीब से संशय देखते हैं. ठीक ठीक वजह तो मुझे भी नहीं मालूम लेकिन बहुत दिनों बाद यह एक ऐसा दौर है कि मेरे ...
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September 5, 2008
हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं!
सीरीफोर्ट में एशियाई और अरब फिल्मों का एक बार फ़िर जमावड़ा. दसवें ओसियन सिनेफैन फ़िल्म फेस्टिवल की शुरुआत. पहले दिन ही कुछ महत्त्वपूर्ण सबक मिले जो आपके काम आ सकते हैं. अपनी सीट पर बैठते वक़्त सावधान रहें. और कोशिश करें कि फेस्टिवल में अगले दो-तीन दिन कोई नया कपड़ा ...
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July 11, 2008


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