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आसमां के पार शायद और कोई आसमां होगा

पिछले एक महीने से मैं ख़ामोश हूँ. सिनेमा का पर्दा भी रुका हुआ है. देश की राजनीति भी चुनाव नतीजों के साथ ही तमाम अटकलों के विपरीत और तमाम अप्रत्याशित को धता बताते हुए तयशुदा रास्तों की तरफ़ जा रही है. क्या ये एंटी-क्लाईमैक्स का दौर है? और तो और ...

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June 2, 2009

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आधी दुनिया का कच्चा-’चिट्ठा’

तात्कालिक आग्रह पर लिखा गया समसामयिक चर्चा से रचा आलेख. अप्रकाशित रह जाने की वजह से अपने चिट्ठे पर लगा रहा हूँ. महिला दिवस पर कहीं गहरे बनस्थली को याद करते हुए जहाँ आज भी मुझे मेरा पीछे छूटा हुआ माइक्रोकॉस्म दीखता है. ********** "मैं दरवाज़ा थी,मुझे जितना पीटा गया,मैं उतना ही ...

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March 9, 2009

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सारी तालीमात

शीत ऋतु की एक सुबह शिक्षिका ने बच्चों को प्रात:कालीन दृश्य बनाने के लिए कहा. एक बच्चे ने अपना चित्र पूरा किया और पार्श्व को गाढ़ा कर दिया लगभग सूर्य को छिपाते हुए. "मैंने तुम्हें प्रात:कालीन दृश्य बनाने के लिए कहा था, सूर्य को चमकना चाहिए." शिक्षिका चिल्ला उठी, उसने यह ...

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August 4, 2008

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विम्बलडन में बजता संगीत

टेनिस का महानतम मैच देखा अभी. और उगते सूरज को सलाम किया. फ़िर उगते सूरज से सुना कि बादशाह अभी भी फेडरर ही है. हारने के बावजूद मुझे उसके वो शॉट्स हमेशा याद रहेंगे जो उसने चैम्पियनशिप पॉइंट बचाने के लिए खेले थे. कुछ अदभुत ही था... मैच में रह ...

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July 8, 2008