ओशियंस में गुलज़ार और विशाल की जुगलबन्दी
ओशियंस में गुलज़ार और विशाल भारद्वाज साथ थे. बात तो ’कमीने’ पर होनी थी लेकिन शुरुआत में कुछ बातें संगीत को लेकर भी हुईं. बातों से सब समझ आता है इसलिए हर बात के साथ उसे कहने वाले का नाम जोड़ना ज़रूरी नहीं लगता. सम्बोधन से ही सब साफ़ हो जाता ...
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November 13, 2009
“शंकर शैलेन्द्र को हिन्दी सिनेमा का सबसे बड़ा गीतकार कहा जा सकता है.” -गुलज़ार.
इस बार के ओशियंस में प्रस्तुत गुलज़ार साहब का पर्चा “हिन्दी सिनेमा में गीत लेखन (1930-1960)” बहुत ही डीटेल्ड था और उसमें तीस और चालीस के दशक में सिनेमा के गीतों से जुड़े एक-एक व्यक्ति का उल्लेख था. वे बार-बार गीतों की पंक्तियाँ उदाहरण के रूप में पेश करते थे ...
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October 29, 2009
इसे कहते हैं धमाकेदार शुरुआत!
इस बार के ओशियंस में लाइफ़ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित हुए गुलज़ार साहब समारोह के डायरेक्टर जनरल मणि कौल के हाथों तैयार किया प्रशस्ति पत्र ग्रहण कर बैठने को हुए ही थे कि अचानक मंच संचालक रमन पीछे से बोले, “गुलज़ार साहब, हमने आपके लिए कुछ सरप्राइज़ रखा है!” ...
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October 25, 2009
सिद्धार्थ- द प्रिजनर : महानगरीय सांचे में ढली नीतिकथा
मूलत: तहलका समाचार के फ़िल्म समीक्षा खंड ’पिक्चर हॉल’ में प्रकाशित ***** बचपन में पंचतंत्र और हितोपदेश की कहानियाँ सुनकर बड़ी हुई हिन्दुस्तान की जनता के लिए ’सिद्दार्थ, द प्रिज़नर’ की कहानी अपरिचित नहीं है. सोने का अंडा देने वाली मुर्गी और व्यापारी की कहानी के ज़रिये ’लालच बुरी बला है’ का ...
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March 4, 2009
मोहनदास
विचित्र प्रोसेशन, गंभीर क्विक मार्च ... कलाबत्तूवाली काली ज़रीदार ड्रेस पहने चमकदार बैंड-दल- अस्थि-रूप, यकृत-स्वरूप,उदर-आकृति आँतों के जालों-से उलझे हुए, बाजे वे दमकते हैं भयंकर गंभीर गीत-स्वन-तरंगें ध्वनियों के आवर्त मँडराते पथ पर. बैंड के लोगों के चेहरे मिलते हैं मेरे देखे हुओं से, लगता है उनमें कई प्रतिष्ठित पत्रकार इसी नगर के ! ! बड़े-बड़े नाम अरे, कैसे शामिल हो गए ...
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July 18, 2008
रणवीर शौरी का होना या ना होना.
Finally... इतने इंतज़ार के बाद कल आख़िरकार Osian's में रणवीर शौरी के दर्शन हो ही गये! उसके बिना Osian's कुछ अधूरा-अधूरा सा लगता है. पिछली बार वो अपनी नई फ़िल्म मिथ्या के साथ यहाँ था. मिथ्या जो इस साल की सबसे उल्लेखनीय और जटिल फिल्मों में से एक बनकर उभरी ...
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July 17, 2008
हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं!
सीरीफोर्ट में एशियाई और अरब फिल्मों का एक बार फ़िर जमावड़ा. दसवें ओसियन सिनेफैन फ़िल्म फेस्टिवल की शुरुआत. पहले दिन ही कुछ महत्त्वपूर्ण सबक मिले जो आपके काम आ सकते हैं. अपनी सीट पर बैठते वक़्त सावधान रहें. और कोशिश करें कि फेस्टिवल में अगले दो-तीन दिन कोई नया कपड़ा ...
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July 11, 2008



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