एक फ़िल्म, एक उपन्यास और गांधीगिरी का अंत.
यूँ देखें तो मेरा राजकुमार हीरानी के सिनेमा से सीधा जुड़ाव रहा है. मेरा पहला रिसर्च थिसिस उनकी ही पिछली फ़िल्म पर था. तीन महीने दिए हैं उनकी ’गांधीगिरी’ को. 'लगे रहो मुन्नाभाई' के गांधीगिरी सिखाते गांधी ’सबाल्टर्न’ के गांधी हैं. किसी रिटायर्ड आदमी को उसकी पेंशन दिलवाने का नुस्खा ...
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January 13, 2010
“मैं खामोशी की मौत नहीं मरना चाहता!” ~पीयूष मिश्रा.
पीयूष मिश्रा से मेरी मुलाकात भी अनुराग कश्यप की वजह से हुई. पृथ्वी थियेटर पर अनुराग निर्मित पहला नाटक 'स्केलेटन वुमन' था और पीयूष वहीं बाहर दिख गए. मैंने थोड़ा जोश में आकर पूछ लिया कि आपका इंटरव्यू कर सकता हूँ एक हिंदी ब्लॉग के लिए - साहित्य, राजनीति और ...
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June 3, 2009
मोहनदास
विचित्र प्रोसेशन, गंभीर क्विक मार्च ... कलाबत्तूवाली काली ज़रीदार ड्रेस पहने चमकदार बैंड-दल- अस्थि-रूप, यकृत-स्वरूप,उदर-आकृति आँतों के जालों-से उलझे हुए, बाजे वे दमकते हैं भयंकर गंभीर गीत-स्वन-तरंगें ध्वनियों के आवर्त मँडराते पथ पर. बैंड के लोगों के चेहरे मिलते हैं मेरे देखे हुओं से, लगता है उनमें कई प्रतिष्ठित पत्रकार इसी नगर के ! ! बड़े-बड़े नाम अरे, कैसे शामिल हो गए ...
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July 18, 2008
प्रेम के पक्ष में…
साल 1986. राजीव गाँधी ने ये दाँव खेला था. मुस्लिम कट्टरपंथियों को फायदा पहुँचाने के लिये शाहबानो केस में फैसला पलटा गया और हिंदु कट्टरपंथियों को अयोध्या में ताला खोल चुप कराया गया. कुछ दोस्त शाहबानो केस को मुस्लिम तुष्टीकरण कहते हैं और ये भूल जाते हैं कि आधी मुस्लिम ...
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November 24, 2007


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