बदहवास शहर में फंसी जिन्दगियों की कहानी : कमीने
उस शाम सराय में रविकांत और मैं मुम्बई की पहचान पर ही तो भिड़े थे. ’मुम्बई की आत्मा महानगरीय है लेकिन दिल्ली की नहीं’ कहकर मैंने एक सच्चे दिल्लीवाले को उकसा दिया था शायद. ’और इसी महानगरीय आत्मा वाले शहर में शिवसेना से लेकर मनसे तक के मराठी मानुस वाले ...
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August 21, 2009
हम बड़े हुए, शहर बदल गए…
तुम अपने अकेलेपन की कहानियाँ कहो. तुम अपने डर को बयान करो. तुम अपने दुःख को किस्सों में गढ़ कर पेश करो. दुनिया यूँ सुनेगी जैसे ये उनकी ही कहानी है. हर लेखक हरबार अपनी ही कहानी कहता है. कथा और इतर-कथा तो बस बात कहने के अलग अलग रूप ...
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November 5, 2008
सचिन नामक मिथक की खोज उर्फ़ सुनहरे गरुड़ की तलाश में.
सचिन हमारी आदत में शुमार हैं. रविकांत मुझसे पूछते हैं कि क्या सचिन एक मिथक हैं? हमारे तमाम भगवान मिथकों की ही पैदाइश हैं. क्रिकेट हमारा धर्म है और सचिन हमारे भगवान. यह सराय में शाम की चाय का वक्त है. रविकांत और संजय बताते हैं कि वे चौबीस तारीख़ ...
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May 30, 2008
पधारो म्हारे देस!
कहाँ रंगीन मिजाज़ शेन वार्न और कहाँ पारंपरिक राजस्थान. जनता शंका में थी जी... सच्ची! कुछ शहर के बारे में... जयपुर के पुराने शहर में घरों का गुलाबी रंग कुछ उड़ा-उड़ा सा है लेकिन अब भी बाकी है. और इसके साथ ही जयपुर ने अपना ठेठ हिन्दुस्तानी अंदाज अब भी बचा ...
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May 7, 2008
उदय भारतीय क्रिकेट के युवराज का
इंडिया-इंग्लैंड मैच मे देखी गई उस स्वर्गिक पारी के बाद जिसे युवराज ने कंगारुओं के ख़िलाफ़ दोहरा दिया. खेल में देखे गए सबसे शुद्ध बल्लेबाजो में से एक के लिए... "दिनों, महिनों, साल लोग इंतज़ार करते हैं। आसमाँ की ओर सर करके दुआएँ करते हैं। उस एक शाम का जब उनकी ...
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September 23, 2007


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