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नैतिक दुविधा से ग्रस्त खूनी खेल: रेस

एक बात है, अब्बास-मस्तान नामधारी यह सफ़ेदपोश निर्देशक जोड़ा जब भी बदले के खूनी खेल से भरी कहानियाँ बनता है तो अपनी पिच पर खेलता नज़र आता है. और यह भी सही है कि श्रीराम राघवन नामक चमत्कार के हिन्दी सिनेमा में अवतरित होने से पहले थ्रिलर के क्षेत्र में ...

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March 28, 2008

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जब वी मेट : ‘किस्सा-ऐ-कसप’

आज फ़िल्मफेयर देखते हुए लगा कि यह पुरानी पोस्ट (13 नवम्बर) जो मैंने अपने ब्लॉग कबाड़ में डाल दी थी पोस्ट कर दी जानी चाहिए. आख़िर 'गीत' को एक के बाद एक पुरस्कार मिल रहे हैं! अब तो यह मुझ अकेले की तमन्ना का बयान नहीं. इससे identify करने वाले ...

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March 2, 2008

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मिथ्या: खोई हुई पहचान की तलाश में

"मैं जान जाता कि यह एक सपना है. लेकिन यह पता चल जाने के बावजूद मैं अच्छी तरह से जानता कि तब भी मैं अपनी इस मृत्यु से बच नहीं सकता. मृत्यु नहीं -तिरिछ द्वारा अपनी हत्या से- और ऐसे में मैं सपने में ही कोशिश करता कि किसी तरह ...

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February 27, 2008

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चक दे इंडिया : हुँकारा आज भर ले…

ये एक अजीब सी तुलना है. पिछले सप्ताह मैनें अमिताभ को "सी.एन.एन. आई.बी.एन." पर बोलते सुना. स्वत्नंत्रता दिवस के दिन अमिताभ अपनी पसन्दीदा फिल्मों के बारे में बात कर रहे थे. अम्रर अकबर एन्थोनी की बात आने पर उन्होनें कहा कि हम सभी को लगता था कि इतना अतार्किक विचार ...

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September 3, 2007