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मोहनदास

विचित्र प्रोसेशन, गंभीर क्विक मार्च ... कलाबत्तूवाली काली ज़रीदार ड्रेस पहने चमकदार बैंड-दल- अस्थि-रूप, यकृत-स्वरूप,उदर-आकृति आँतों के जालों-से उलझे हुए, बाजे वे दमकते हैं भयंकर गंभीर गीत-स्वन-तरंगें ध्वनियों के आवर्त मँडराते पथ पर. बैंड के लोगों के चेहरे मिलते हैं मेरे देखे हुओं से, लगता है उनमें कई प्रतिष्ठित पत्रकार इसी नगर के ! ! बड़े-बड़े नाम अरे, कैसे शामिल हो गए ...

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July 18, 2008