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यथार्थ की उलटबांसियाँ : मटरू की बिजली का मंडोला

" बड़ी प्रार्थना होती है। जमाखोर अौर मुना़फाखोर साल-भर अनुष्ठान कराते हैं। स्मगलर महाकाल को नरमुण्ड भेंट करता है। इंजीनियर की पत्नी भजन गाती हैं - 'प्रभु कष्ट हरो सबका'। भगवन्‌, पिछले साल अकाल पड़ा था तब सक्सेना अौर राठौर को अापने राहत कार्य दिलवा दिया था। प्रभो, इस साल ...

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January 21, 2013

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सिनेमाई संगीत में प्रामाणिकता की तलाश

“हिन्दी सिनेमा के संगीत से मेलोडी चली गई. आजकल की फ़िल्मों के गीत वाहियात होते जा रहे हैं. पहले के गीतों की तरह फ़िल्म से अलग वे याद भी नहीं रहते. जैसे उनका जीवन फ़िल्म के भीतर ही रह गया है, बाहर नहीं.” पिछले दिनों सिनेमाई संगीत से जुड़ी कुछ चर्चाओं ...

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March 12, 2012

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साल सदियों पुराना पक्का घर है

साल, दिखता नहीं पर पक्का घर है हवा में झूलता रहता है तारीखों पर पाँव रख के घड़ी पे घूमता रहता है बारह महीने और छह मौसम हैं आना जाना रहता है एक ही कुर्सी है घर में एक उठता है इक बैठता है जनवरी फ़रवरी बचपन ही से भाई बहन से लगते हैं ठण्ड बहुत लगती है उन को कपड़े गर्म ...

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January 1, 2011

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राँझा राँझा

प्रायद्वीपीय भारत को पछाड़ती, दक्षिण से उत्तर की ओर भागती एक रेलगाड़ी में गुलज़ार  द्वारा फ़िल्म  ’रावण’ के लिए लिखा गीत ’राँझा राँझा’ सुनते हुए... बड़ा मज़ेदार किस्सा है... शुरुआती आलाप में कहीं गहरे महिला स्वर की गूँज है. और बहती हवाओं की सनसनाहट भी जैसे स्त्री रूपा है. रेखा अपनी आवाज़ ...

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June 17, 2010

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ओशियंस में गुलज़ार और विशाल की जुगलबन्दी

ओशियंस में गुलज़ार और विशाल भारद्वाज साथ थे. बात तो ’कमीने’ पर होनी थी लेकिन शुरुआत में कुछ बातें संगीत को लेकर भी हुईं. बातों से सब समझ आता है इसलिए हर बात के साथ उसे कहने वाले का नाम जोड़ना ज़रूरी नहीं लगता. सम्बोधन से ही सब साफ़ हो जाता ...

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November 13, 2009