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‘आप उसे फोन करें’: बद्री नारायण
बद्री नारायण की कविताएं मेरे जीवन में एक घटना की तरह आती हैं. मैं उन्हें व्यवस्थित रूप से नहीं पढ़ता. वे आती हैं, अनिश्चितता और तनाव के क्षणों में वे एक छोटी सी उदास खुशी की तरह आती हैं. अचानक, जैसे हृषिकेश मुखर्जी की ‘बावर्ची’ में रघु भैया आते हैं. भूले हुए गीत को याद दिलाने. और वे मेरा कैनवास बड़ा कर देती हैं.
बद्री नारायण की कविताओं पर मरा जा सकता है. अक्सर उनकी प्रेम-कविताएं डायरी में या किसी रजिस्टर के सबसे पिछले पन्ने पर हू-ब-हू उतार ली जाती हैं और फ़िर किसी दर्जन भर पन्ने वाली, लाल स्याही से लिखी चिट्ठी के तीसरे पन्ने पर बैठकर वे एक पते से दूसरे पते की अक्षांश- देशान्तरों में फ़ैली यात्राएं करती हैं. उनकी कविता ‘प्रेम-पत्र’ मेरी एक पुरानी डायरी के हरे रंग के पन्ने में आज भी दर्ज है.
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आप उसे फोन करें
“आप उसे फोन करें
तो कोई ज़रूरी नहीं कि
उसका फोन खाली हो
हो सकता है उस वक्त
वह चाँद से बतिया रही हो
या तारों को फोन लगा रही हो
वह थोड़ा धीरे बोल रही है
सम्भव है इस वक्त वह किसी भौंरे से
कह रही हो अपना संदेश
हो सकता है वह लम्बी, बहुत लम्बी बातों में
मशगूल हो
हो सकता है
एक कटा पेड़
कटने पर होने वाले अपने
दुखों का उससे कर रहा हो बयान
बाणों से विंधा पखेरू
मरने के पूर्व उससे अपनी अंतिम
बात कह रहा हो
आप फोन करें तो हो सकता है
एक मोहक गीत आपको थोड़ी देर
चकमा दे और थोड़ी देर बाद
नेटवर्क बिजी बताने लगे
यह भी हो सकता है एक छली
उसके मोबाइल पर फेंक रहा हो
छल का पासा
पर यह भी हो सकता है कि एक फूल
उससे कांटे से होने वाली
अपनी रोज रोज की लड़ाई के
बारे में बतिया रहा हो
या कि रामगिरी पर्वत से
चल कोई हवा
उसके फोन से होकर आ रही हो
याकि चातक, चकवा, चकोर उसे
बार बार फोन कर रहे हों
यह भी सम्भव है कि
कोई गृहणी रोटी बनाते वक़्त भी
उससे बातें करने का लोभ संवरण
न कर पाये
और आपके फोन से उसका फोन टकराये
आपका फोन कट जाये
हो सकता है उसका फोन
आपसे ज़्यादा
उस बच्चे के लिए ज़रूरी हो
जो उसके साथ हंस हंस
मलय नील में बदल जाना चाहता हो
वह गा रही हो किसी साहिल का गीत
या हो सकता है कोई साहिल उसके
फोन पर, गा रहा हो
उसके लिए प्रेमगीत
या कि कोई पपीहा
कर रहा हो उसके फोन पर
पीऊ पीऊ
आप फोन करें तो कोई ज़रूरी
नहीं कि
उसका फोन खाली हो.”
~बद्री नारायण.
‘तद्भव-18′ से साभार.
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बहुत सुंदर । बेहद संवेदनशील । बहुत अदभुत कविता ।
बद्रीनारायण जी इस कविता को नमन है ।
hi , I’ve just read your post . it was great. let me have enough time to calculate and relish it .
I’m very fond of movies.
I’m definitely going to enjoy your reviews.
http://www.apnaakhar.blogspot.com
Acchee kavita padhwane ke liye shukriya.
बहुत सुंदर। बहुत खूब।
Kavita ek samvad hai,phone ka sandarv kafi dilchasp hai —— acchee kavita ke liye sukriya.
bhut sunder kavita hai.