<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>आवारा हूँ... &#187; IPL</title>
	<atom:link href="http://mihirpandya.com/tag/ipl/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://mihirpandya.com</link>
	<description>सिनेमा, साहित्य, खेल, संगीत, एक युवा शहर धड़कता है यहाँ...</description>
	<lastBuildDate>Tue, 24 Aug 2010 15:57:28 +0000</lastBuildDate>
	<generator>http://wordpress.org/?v=2.8.4</generator>
	<language>en</language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
			<item>
		<title>सचिन नामक मिथक की खोज उर्फ़ सुनहरे गरुड़ की तलाश में.</title>
		<link>http://mihirpandya.com/2008/05/%e0%a4%b8%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%9c-%e0%a4%89%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ab/</link>
		<comments>http://mihirpandya.com/2008/05/%e0%a4%b8%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%9c-%e0%a4%89%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ab/#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 30 May 2008 02:34:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>मिहिर</dc:creator>
				<category><![CDATA[Memoir]]></category>
		<category><![CDATA[cricket]]></category>
		<category><![CDATA[IPL]]></category>
		<category><![CDATA[सचिन]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.mihirpandya.com/blog/?p=18</guid>
		<description><![CDATA[
सचिन हमारी आदत में शुमार हैं. रविकांत मुझसे पूछते हैं कि क्या सचिन एक मिथक हैं? हमारे तमाम भगवान मिथकों की ही पैदाइश हैं. क्रिकेट हमारा धर्म है और सचिन हमारे भगवान. यह सराय में शाम की चाय का वक्त है. रविकांत और संजय बताते हैं कि वे चौबीस तारीख़ को फिरोजशाह कोटला में IPL [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://bp1.blogger.com/_oWd-c4uUHz4/SD_05sF-duI/AAAAAAAAAEo/BU6lxK3NTfo/s1600-h/best_86312a.jpg" onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5206148966189528802" style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer;" src="http://bp1.blogger.com/_oWd-c4uUHz4/SD_05sF-duI/AAAAAAAAAEo/BU6lxK3NTfo/s320/best_86312a.jpg" border="0" alt="" /></a><br />
<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Sachin_Tendulkar"><span><span>सचिन</span></span></a> हमारी <span>आदत</span> में शुमार हैं. रविकांत मुझसे पूछते हैं कि क्या सचिन एक मिथक हैं? हमारे तमाम भगवान मिथकों की ही पैदाइश हैं. क्रिकेट हमारा धर्म है और सचिन हमारे भगवान. यह सराय में शाम की चाय का वक्त है. रविकांत और <span>संजय</span> बताते हैं कि वे चौबीस तारीख़ को फिरोजशाह कोटला में <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Indian_Premier_League">IPL</a> का मैच देखने जा रहे हैं. रविकांत चाहते हैं कि मुम्बई आज मोहाली से हार जाए. यह दिल्ली के सेमी में <span><span><span>पहुँच</span></span></span>ने के लिए ज़रूरी है. दिल्ली नए खिलाड़ियों की टीम है और उसे सेमी में होना ही चाहिए. आशीष को सहवाग का उजड्डपन पसंद नहीं है. संजय जानना चाहते हैं कि क्या मैदान में सेलफोन ले जाना मना है? मैं <span>उन्हें</span> बताता हूँ कि मैं भी जयपुर में छब्बीस तारीख़ को होनेवाला आखिरी मैच देखने की कोशिश करूंगा. यह राजस्थान और मुम्बई के बीच है. चाय के प्याले और बारिश के शोर के बीच हम सचिन को बल्लेबाज़ी करते देखते हैं. रविकांत मुझसे पूछते हैं कि क्या सचिन एक खिलाड़ी नहीं मिथक का नाम है? वे चौबीस तारीख़ को दिल्ली-मुम्बई मैच देखने जा रहे हैं और मैं छब्बीस तारीख़ को राजस्थान-मुम्बई. चाय के प्याले और बारिश के शोर के बीच मैं अपने आप से पूछता हूँ&#8230;</p>
<p>कहते हैं सचिन अपने बोर्ड एग्जाम्स में सिर्फ़ 6 अंकों से मैच हार गए थे. उनका तमाम क्रिकेटीय जीवन इसी अधूरे 6 रन की भर<span><span><span>पाई</span></span></span> है. क्रिकेट के आदि पुरूष <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Donald_Bradman"><span>डॉन</span> <span>ब्रेडमैन</span></a> से उनके अवतार में यही मूल अंतर है. सचिन क्रिकेट के एकदिवसीय युग की पैदाइश हैं. डॉन के पूरे टेस्ट जीवन में छक्कों की संख्या का कुल जोड़ इकाई में है. उनका अवतार अपनी एक पारी में इससे अधिक छक्के मारता है. सचिन हमें ऊपर खड़े होकर नीचे देखने का मौका देते हैं. शिखर पर होने का अहसास. सर्वश्रेष्ठ होने का अहसास.</p>
<p>सचिन टेस्ट क्रिकेट के सबसे महान बल्लेबाज़ नहीं हैं. <a href="http://www.cricinfo.com/almanack/almanack-splash.html"><span>विज्डन</span></a> ने <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Wisden_Cricketers_of_the_Century">सदी का महानतम क्रिकेटर</a> चुनते हुए उन्हें बारहवें स्थान पर रखा था. एकदिवसीय के महानतम बल्लेबाज़ ने भारत को कभी विश्वकप नहीं जिताया है. वे एक असफल कप्तान रहे और उनके नाम लगातार पांच टेस्ट हार का रिकॉर्ड दर्ज है. माना जाता है कि उनकी तकनीक अचूक नहीं है और वह बांयें हाथ के स्विंग गेंदबाजों के सामने परेशानी महसूस करते हैं. उनके बैट और पैड के बीच में गैप रह जाता है और इसीलिए उनके आउट होने के तरीकों में बोल्ड और IBW का प्रतिशत सामान्य से ज़्यादा है. तो आख़िर यह सचिन का मिथक है क्या?</p>
<p><a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Shahrukh_Khan"><span>शाहरुख़</span></a> और सचिन वैश्वीकरण की नई राह पकड़ते भारत का प्रतिनिधि चेहरा हैं. यह 1992 विश्वकप से पहले की बात है. <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/India_Today">&#8216;इंडिया टुडे&#8217;</a>, जिसकी खामियाँ और खूबियाँ उसे भारतीय मध्यवर्ग की प्रतिनिधि पत्रिका बनाती हैं, को आनेवाले विश्वकप की तैयारी में क्रिकेट पर कवर स्टोरी करनी थी. उसने इस कवर स्टोरी के लिए खेल के बजाए इस खेल<a href="http://bp1.blogger.com/_oWd-c4uUHz4/SD_1MsF-dvI/AAAAAAAAAEw/a2FaJutmT8Q/s1600-h/tendulkarchildhoodyoung.jpg" onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5206149292607043314" style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer; width: 130px; height: 202px;" src="http://bp1.blogger.com/_oWd-c4uUHz4/SD_1MsF-dvI/AAAAAAAAAEw/a2FaJutmT8Q/s320/tendulkarchildhoodyoung.jpg" border="0" alt="" /></a> के एक नए उभरते सितारे को चुना. गौर कीजिये यह उस दौर की बात है जब सचिन ने अपना पहला एकदिवसीय शतक भी नहीं बनाया था. एक ऐसी कहानी जिसमें कुछ भी नकारात्मक नहीं हो. भीतर स<span><span><span>चिन</span></span></span> के बचपन की लंबे घुंघराले बालों वाली मशहूर तस्वीर थी. वो बचपन में जॉन मैकैनरो का फैन था और उन्हीं की तरह हाथ में पट्टा बाँधता था. उसे दोस्तों के साथ कार में तेज़ संगीत बजाते हुए लांग ड्राइव पर जाना पसंद है. यह सचिन के मिथकीकरण की शुरुआत है. एक बड़ा और सफ़ल खिलाड़ी जिसके पास अरबों की दौलत है लेकिन जिसके लिए आज भी सबसे कीमती वो तेरह एक रूपये के सिक्के हैं जो उसने अपने गुरु रमाकांत अचरेकर से पूरा दिन बिना आउट हुए बल्लेबाज़ी करने पर इनाम में पाए थे. एक मराठी कवि का बेटा जो अचानक मायानगरी <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Mumbai">मुम्बई </a>का, जवान होती नई पीढ़ी और उसके अनंत ऊँचाइयों में पंख पसारकर उड़ते सपनों का, नई करवट लेते देश का प्रतीक बन जाता है. और यह सिर्फ़ युवा पीढ़ी की बात नहीं है. जैसा मुकुल केसवन उनके आगमन को यादकर लिखते हैं कि बत्तीस साल की उमर में उस सोलह साल के लड़के के माध्यम से मैं वो उन्मुक्त जवानी फ़िर जीना चाहता था जो मैंने अपने जीवन में नहीं पाई.</p>
<p>सचिन की बल्लेबाज़ी में उन्मुक्तता रही है. उनकी महानतम एकदिवसीय पारियाँ इसी बेधड़क बल्लेबाज़ी का नमूना हैं. हिंसक तूफ़ान जो रास्ते में आनेवाली तमाम चीजों को नष्ट कर देता है. 1998 में आस्ट्रेलिया के विरुद्ध शारजाह में उनके बेहतरीन शतक के दौरान तो वास्तव में रेत का तूफ़ान आया था. लेकिन बाद में देखने वालों ने माना कि सचिन के बल्ले से निकले तूफ़ान के मुकाबले वो तूफ़ा<span><span><span>न</span></span></span> फ़ीका था. यही वह श्रृंखला है जिसके बाद रिची बेनो ने उन्हें विश्व का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ कहा था. यहाँ तक आते-आते सचिन नामक मिथक स्थापित होने लगता है. लेकिन सचिन नामक यह मिथक उनकी बल्लेबाज़ी की उन्मुक्तता में नहीं है. वह उनके व्यक्तित्व की साधारणता में छिपा है. उनके समकालीन महान<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Brian_Lara"> <span>ब्रायन</span> <span>लारा</span></a> अपने घर में बैट की शक्ल का स्विमिंग पूल बनवाते हैं. सचिन सफलता के बाद भी लंबे समय तक अपना पुराना साहित्य सहवास सोसायटी का घर नहीं छोड़ते. एक और समकालीन महान <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Shane_Warne"><span>शेन</span> <span>वॉर्न</span></a> की तरह उनके व्यक्तिगत जीवन में कुछ भी मसालेदार और विवादास्पद नहीं है. वे एक आदर्श नायक हैं. मर्यादा पुरुषोत्तम राम की तरह. लेकिन जब वह बल्लेबाज़ी करने मैदान पर आते हैं तो कृष्ण की तरह लीलाएं दिखाते हैं. शेन वॉर्न का कहना है कि सचिन उनके सपनों में आते हैं और उ<span><span><span>नकी</span></span></span> गेंदों पर आगे बढ़कर छक्के लगाते हैं.</p>
<p>सचिन नब्बे के दशक <span><span><span>के</span></span></span> हिंदुस्तान की सबसे सुपरहिट फ़िल्म हैं. इसमें ड्रामा है, इमोशन है, ट्रेजेडी है, संगीत है और सबसे बढ़कर &#8216;फीलगुड&#8217; है. एक बेटा है जो पिता की मौत के ठीक बाद अपने कर्मक्षेत्र में वापिस आता है और अपना कर्तव्य बख़ूबी पूरा <a href="http://bp0.blogger.com/_oWd-c4uUHz4/SD_9kcF-dwI/AAAAAAAAAE4/fuE4d7MJb00/s1600-h/2281831206_d29335bbeb_m.jpg" onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5206158496721958658" style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer;" src="http://bp0.blogger.com/_oWd-c4uUHz4/SD_9kcF-dwI/AAAAAAAAAE4/fuE4d7MJb00/s320/2281831206_d29335bbeb_m.jpg" border="0" alt="" /></a><span><span><span>करता</span></span></span> है. एक दोस्त है जो सफलता की बुलंदियों पर पहुँचकर भी अपने <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Vinod_Kambli">दोस्त </a>को नहीं भूलता और उसकी नाकामयाबी <span>की</span> टीस सदा  अपने दिल में रखता है. एक ऐसा आदर्श नायक है जो मैच फिक्सिंग के दलदल से भी बेदाग़ बाहर निकल <span><span><span>आता</span></span></span> है. नब्बे का दशक भारतीय मध्यवर्ग के लिए अकल्पित सफलता का दौर तो है लेकिन अनियंत्रित विलासिता का नहीं. सचिन इसका प्रतिनिधि चेहरा बनते हैं. और हमेशा की तरह एक सफलता की गाथा को मिथक में तब्दील कर उसके पीछे हजारों बरबाद जिंदगियों की <span><span><span>कहानी</span></span></span> को दफ़नाया जाता है.</p>
<p>सचिन मेरे सामने हैं. पहली बार आंखों के सामने, साक्षात्! मैं उन्हें खेलते देखता हूँ. वे थके से लगते हैं. वे लगातार अपनी ऊर्जा बचा रहे हैं. उस आनेवाले रन के लिए जो उन्हें फ़ुर्ती से दौड़ना होगा. अबतक वे एक हज़ार से ज़्यादा दिन की अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके हैं. अगले साल उन्हें इस दुनिया में बीस साल पूरे हो जायेंगे. और फ़िर अचानक वे शेन वाटसन का कैच लपकने को एक अविश्वसनीय सी छलाँग लगाते हैं और बच्चों की तरह खुशी से उछल पड़ते हैं. मिथक फ़िर से जी उठता है.</p>
<p>सचिन की टीम मैच हार जाती है. जैसे ऊपर बैठकर कोई इस <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Indian_Premier_League">IPL</a> की स्क्रिप्ट लिख रहा है. चारों पुराने सेनानायकों द्रविड़, सचिन, गाँगुली और लक्ष्मण की सेनाएँ सेमीफाइनल से बाहर हैं. इक्कीसवीं सदी ने अपने नए मिथक गढ़ने शुरू कर दिए हैं और इसका <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Mahendra_Singh_Dhoni">नायक</a> मुम्बई से नहीं राँची से आता है. यह बल्लेबाज़ी ही नहीं जीवन में भी उन्मुक्तता का ज़माना है और इस दौर के नायक घर में बन रहे स्विमिंग पूल, पार्टियों में दोस्तों से झड़प और फिल्मी तारिकाओं से इश्क के चर्चों की वजह से सुर्खियाँ बटोरते हैं. राँची के इस नए नायक के लिए सर्वश्रेष्ठ होना महत्त्वपूर्ण नहीं है, जीतना महत्त्वपूर्ण है.</p>
<p>सितारा बुझकर ब्लैक होल में बदल जाने से पहले कुछ समय तक तेज़ रौशनी देता है. सचिन के प्रसंशकों का मानना है कि वो आँखें चौंधिया देने वाली चमक अभी आनी बाकी है. लेकिन मिथकों को पहले से जानने वाले लोगों को पता है कि देवताओं की मौत हमेशा साधारण होती है. कृष्ण भी एक बहेलिये के तीर से मारे गए थे. एक अनजान बहेलिये के शब्दभेदी बाण से मारा जाना हर भगवान् की और जलते-जलते अंत में बुझकर ब्लैक होल में बदल जाना हर सितारे की आखि़री नियति है.</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://mihirpandya.com/2008/05/%e0%a4%b8%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%9c-%e0%a4%89%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ab/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>7</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>पधारो म्हारे देस!</title>
		<link>http://mihirpandya.com/2008/05/%e0%a4%aa%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b8/</link>
		<comments>http://mihirpandya.com/2008/05/%e0%a4%aa%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b8/#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 07 May 2008 21:22:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>मिहिर</dc:creator>
				<category><![CDATA[cricket]]></category>
		<category><![CDATA[IPL]]></category>
		<category><![CDATA[शेन वार्न]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.mihirpandya.com/blog/?p=17</guid>
		<description><![CDATA[ कहाँ रंगीन मिजाज़ शेन वार्न और कहाँ पारंपरिक राजस्थान. जनता शंका में थी जी&#8230; सच्ची!

कुछ शहर के बारे में&#8230;
जयपुर के पुराने शहर में घरों का गुलाबी रंग कुछ उड़ा-उड़ा सा है लेकिन अब भी बाकी है. और इसके साथ ही जयपुर ने अपना ठेठ हिन्दुस्तानी अंदाज अब भी बचा कर रखा है. राजनीति में [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://bp2.blogger.com/_oWd-c4uUHz4/SCIcXttYdiI/AAAAAAAAAEg/j6KUWzCDzSM/s1600-h/shane1600x1200.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5197748113671484962" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; CURSOR: hand" src="http://bp2.blogger.com/_oWd-c4uUHz4/SCIcXttYdiI/AAAAAAAAAEg/j6KUWzCDzSM/s320/shane1600x1200.jpg" border="0" alt="" /></a> <span>कहाँ</span> रंगीन मिजाज़ <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Shane_Warne">शेन वार्न</a> और कहाँ पारंपरिक राजस्थान. जनता शंका में थी जी&#8230; सच्ची!</p>
<p><strong></strong><br />
<strong><span>कुछ शहर</span> के बारे में&#8230;</strong><br />
जयपुर के पुराने शहर में घरों का गुलाबी रंग कुछ उड़ा-उड़ा सा है लेकिन अब भी बाकी है. और इसके साथ ही जयपुर ने अपना ठेठ हिन्दुस्तानी अंदाज अब भी बचा कर रखा है. राजनीति में जयपुर भा.ज.पा. का गढ़ माना जाता है. गिरधारीलाल भार्गव यहाँ से सांसद हैं और पुरानी बस्ती में उनके बारे में मशहूर है कि शहर में अपनी पैठ उन्होंने लोगों की अर्थियों को कांधा देकर बनाई है. वो रोज़ सुबह उठकर अखबार पढ़ते हैं. देखते हैं कि श्रद्धांजलि वाले कॉलम में किसकी मौत की सूचना है और फिर पहुँच जाते हैं उनके घर. और इसी प्रतिष्ठा के दम पर वो एक चुनाव में जयपुर के राजा भवानी सिंह को भी हरा चुके हैं. कहते हैं कि यहाँ भा.ज.पा. पत्थर की मूरत को भी चुनाव में खड़ा कर दे तो वो भी जीत जाए. समय-समय पर प्रमोद महाजन, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं के लिए सुरक्षित सीट की तलाश में उन्हें जयपुर से लोकसभा का चुनाव लड़वाने का प्रस्ताव आता रहा है. लोकसभा चुनावों में यहाँ शहर में हर तरफ़ एक ही गीत बजता है&#8230; &#8220;शावा नी गिरधारीलाल! बल्ले नी गिरधारीलाल!&#8221;</p>
<p><strong>जीत के पहले&#8230;</strong><br />
16 तारीख को मैं जयपुर पहुँचा. कुछ इस तरह की खबरों ने मेरा स्वागत किया :-</p>
<p>अरे भाई वॉर्न आया है. कोई ना कोई कांड तो करेगा ही! जनता इसी आशंका (पढ़ें उम्मीद) में थी.</p>
<p>सुना है शहर की नर्सों को ख़ास हिदायत दी गई है कि किसी भी अनजान नंबर से SMS आने पर तुरंत IPL के अधिकारियों को सूचित करें. और अगर SMS में गुगली या फ्लिपर जैसे शब्दों का प्रयोग हो तो सीधा ललित मोदी को रिपोर्ट करें.</p>
<p>कुछ लोग यह भी ख़बर लाये थे कि वॉर्न को ख़ास नोकिया 2100 दिया गया है उसके घातक SMS पर नियंत्रण के लिए और उसके फ़ोन को विशेष निगरानी में रखा गया है.</p>
<p>शेन वॉर्न के शहर में आगमन के साथ ही सिगरेट की बिक्री में भारी इजाफा दर्ज किया गया है.</p>
<p>रोहित का कहना था कि हर टीम के पास स्टार है. किसी के साथ शाहरुख़ है तो किसी के साथ प्रिटी जिंटा. इसपर भास्कर का कहना था कि हमारे पास भी तो स्टार है, रोहित राय! और इला अरुण और मिला लो तो फिर और कौन टिकता है हमारे सामने! ऐसा भी सुना गया कि ललित मोदी ने जयपुर में पहले मैच में रोहित राय के पोस्टर बेचे. उसमें रोहित राय शर्ट-लेस अपनी सिक्स पैक ऐब्स दिखा रहा था! क्या बात है, तुम्हारे पास शाहरुख़ तो हमारे पास रोहित राय! वाह क्या मुकाबला है!</p>
<p>पहला मैच देखने आए लोगों को जब पता चला कि समीरा रेड्डी का नाच मैच के पहले ही हो चुका तो उन्होंने अपने पैसे वापिस लौटाने की मांग की. बाकि लोगों ने चीयरलीडर्स से तसल्ली की.</p>
<p><strong>जीत के बाद&#8230;<br />
</strong>लगातार 5 जीत और IPL टेबल में सबसे ऊपर आने के बाद शेन वॉर्न अब राजस्थान का अपना छोरा है. आने वाले समय में आप कुछ ऐसी चीजों के लिए तैयार रहें&#8230;</p>
<p>इस महान वीर कर्म के लिए वॉर्न को तेजाजी,पाबूजी और रामदेव जी की तरह लोकदेवता का दर्जा मिल सकता है. आपकी जानकारी के लिए हम बता दें कि ये सभी लोकदेवता साधारण मनुष्य ही थे जो आमतौर पर गाय या अन्य पशुओं की रक्षा में मारे गए. वैसे ही उसके मन्दिर बन सकते हैं जहाँ परसाद में सिगरेट चढ़ा करेंगी. बोलो शेन वॉर्न महाराज की जय!</p>
<p>अगले RAS के पेपर में राजस्थान के सामान्य ज्ञान में एक सवाल होगा, &#8220;राजस्थान के दो वीर योद्धा जिनका एक ही नाम हैं और जिनके पराक्रम के किस्से बच्चे-बच्चे की ज़बान पर हैं.&#8221; और जवाब होगा, &#8220;शेन वॉर्न और शेन वाटसन.&#8221;</p>
<p>राजकुमार संतोषी अपना सर पीट रहा होगा. कह रहा होगा कि अब अपनी फ़िल्म &#8216;हल्ला बोल&#8217; रिलीज़ करता तो राजस्थान रोयल्स के हल्ला बोल में वो भी चल जाती.</p>
<p>इला अरुण को एक संगीत कम्पनी फिर से प्राइवेट अल्बम का कांट्रेक्ट देगी. वीडियो में रखी सावंत को लिया जाएगा (और कौन!) बाद में दोनों में कौन ज्यादा पैसे लेगा इसको लेकर झगड़ा होगा और दोनों एक-दूसरे से ज्यादा बड़ी आईटम होने का दावा करेंगी. राखी हाल ही में आए &#8216;देखता है तू क्या&#8217; का हवाला देंगी और इला अरुण &#8216;दिल्ली शहर में म्हारो घाघरो जो घूम्यो&#8217; को सबूत के तौर पर पेश करेंगी. फिर इस मुद्दे <span>पर राष्ट्रीय मीडिया द्वारा </span>एक देशव्यापी SMS अभियान चलेगा. नतीजे का हमें भी इंतज़ार है.<br />
&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;</p>
<p>यहाँ सबकुछ मिलेगा सिवाय क्रिकेट के. निवेदन है कि उसकी तलाश ना करें. अगर क्रिकेट देखनी है तो इंग्लैंड- न्यूजीलैंड टेस्ट सीरीज़ (15 मई) और ऑस्ट्रेलिया- वेस्ट इंडीज़ टेस्ट सीरीज़ (22 मई) का इंतज़ार करें. चाहें तो 11 मई को मैनचेस्टर यूनाइटेड को खिताब जीतते देखें जैसी उम्मीद है.</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://mihirpandya.com/2008/05/%e0%a4%aa%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b8/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>8</slash:comments>
		</item>
	</channel>
</rss>
