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पहुँचना ’127 आर्स’ तक बारास्ते ’आमिर’ के

यह तुलना जैसे चांद और सूरज की जोड़ी बनाने जैसी है. एक दूसरे का विलोम होते हुए भी जहाँ से हम उन्हें देखते हैं, वे एक-दूसरे के पूरक नज़र आते हैं. दूसरा पहले से जितना दूर है उतना ही बड़ा भी है. पहला जब दूसरे के सामने आ ...

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March 24, 2011

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यह परिवार तो जाना-पहचाना है

यह गलती कई बार होती है. पुरुषसत्तात्मकता को कोसते हुए हम कई बार सीधे परिवार के मुखिया पुरुष को कोसने लगते हैं. जैसे उसके बदलते ही सब ठीक हो जाना है. लेकिन गलत उसका पुरुष होना नहीं, गलत वह विचार है जिसे उसका व्यक्तित्व अपने साथ ढोता ...

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March 21, 2011

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देवदास का वर्ज़न 2.0

उमर अभी पच्चीस हुई ही है और अपनी संगत में ठीक-ठाक स्मार्ट गिना जाता हूँ. मैं ’द सोशल नेटवर्क’ देखते हुए अपने को कुछ पुराना महसूस करता हूँ. मेरा छोटा भाई, जिसमें और मुझमें उमर के दो साल और शायद उतनी ही पीढ़ियों का फ़ासला है, जब भी पलटकर ...

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March 20, 2011

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मेरी शुभकामनाएं ’ब्लैक स्वॉन’ के साथ हैं, उम्मीदें भी.

एक और सोमवार सुबह का जागना, एक और ऑस्कर की रात का इंतज़ार. उस सितारों भरी रात से पहले उन फ़िल्मों की बातें जिनका नाम उस जगमगाती रात बार-बार आपकी ज़बान पर आना है. पेश हैं इस साल ऑस्कर की सरताज पाँच ख़ास फ़िल्में मेरी नज़र से. 1.   दि किंग्स स्पीच इस ...

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February 28, 2011

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फिर एक ’जाने भी दो यारों’ की तलाश में

“नेहरूवियन सपना तब बुझ चुका था और राजनैतिक नेताओं की जमात राक्षसों में बदल चुकी थी. हर आदमी भ्रष्ट था और हमारा शहर अब उन्हीं भ्रष्ट राजनेताओं और अफ़सरानों के कब्ज़े में था. भू-माफ़ियाओं के साथ मिलकर उन्होंने पूरी व्यवस्था को एक कूड़ेदान में बदल दिया ...

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February 21, 2011

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हिन्दी सिनेमा में प्रेम की अजीब दास्तान

हिन्दी सिनेमा के पुराने पन्ने पलटते हुए कई बार मुझे ताज्जुब होता है कि क्या यही वो कहानियाँ थीं जिनके बलबूते हमारे इश्क़ पीढ़ियों परवान चढ़े? हिन्दी सिनेमा अपवादों को छोड़कर खासा यथास्थितिवादी रहा है और ऐसे में प्रेम जैसे स्वभाव से यथास्थितिवाद विरोधी मनोभाव का इसके मूल दर्शन के ...

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February 3, 2011

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अभिनेता के अवसान का साल

पिछला साल खत्म हुआ था ’थ्री ईडियट्स’ के साथ, जिसे इस साल भी लगातार हिन्दी सिनेमा की सबसे ’कमाऊ पूत’ के रूप में याद किया जाता रहा. इस साल आई ’दबंग’ से लेकर ’राजनीति’ तक हर बड़ी हिट की तुलना ’थ्री ईडियट्स’ के कमाई के आंकड़ों से की जाती रही. ...

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January 5, 2011

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2010 : पांच किरदार

विद्या बालन – इश्किया जवान होती शीलाओं और बदनाम होती मुन्नियों के समय में हो सकता है कि आप विद्या बालन की ठीक-ठीक जगह न पहचान पाएं. लेकिन बीस-तीस साल बाद जब इतिहास के पन्नों में यह धुंध छंट चुकी होगी, उनका नाम उसी क्रम में होगा ...

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January 4, 2011

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2010 : पहले तीन नाम

दुस्साहस कल-कल सच्चाई

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December 31, 2010

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मनोरंजन का बदला चेहरा

पिछले हफ़्ते रामकुमार ने कहा कि बीते दशक में बदलते हिन्दुस्तानी समाज की विविध धाराओं को एक अंक में समेटने की कोशिश है. आप पिछले दशक के सिनेमा पर टिप्पणी लिखें. ख़्याल मज़ेदार था. लिखा हुआ आज की पत्रिका के रविवारीय परिशिष्ठ में प्रकाशित हुआ है. मज़ेदार बात ...

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December 26, 2010