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हम के ठहरे अजनबी इतनी मुलाकातों के बाद

सथ्यू साहेब की 'गरम हवा' का यह परिचय दो महीने पहले हुए पहले 'उदयपुर फिल्म फेस्टिवल' के पहले अाई फेस्टिवल स्मारिका लिए लिखा था, जहाँ की यह समापन फिल्म थी.  हिन्दी साहित्य की तरह हिन्दी सिनेमा पर भी यह अारोप लगाया जा सकता है कि उसने हिन्दुस्तान के इतिहास में अाये ...

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November 14, 2013

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मामी – एक

कल शहर में कदम रखते ही पहले अॉटोवाले ने मीटर से चलने से इनकार किया. अौर अाज सुबह फिर टैक्सी वाले ने चलने से ही इनकार कर दिया. राखी-वरुण का कहना है कि हम दिल्लीवाले अपने साथ दिल्ली के अॉटो-टैक्सीवालों को भी उनके भले शहर में ले अाये हैं. इस ...

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October 19, 2013

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सुंदर का स्वप्न : शिप अॉफ थिसियस

शायद किराये के मकानों में ऐसा अक्सर होता है। जिस घर में हम रहने अाये, उसकी दीवारों पर पिछले रहनेवालों के निशान पूरी तरह मिटे नहीं थे। ख़ासकर बच्चों की उपस्थिति के निशान। कमरे की दीवारों पर रंग बिरंगी पेंसिल की कलाकारियाँ अौर अलमारियों पर सांता क्लाज़ के स्टिकर। अौर ...

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July 22, 2013

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पान सिंह तोमर वाया साहिब, बीवी अौर गैंग्स्टर

ज़्यादा पुरानी बात नहीं है। 'पान सिंह तोमर' बनकर तैयार थी अौर उसे मठाधीशों द्वारा सार्वजनिक प्रदर्शन के अयोग्य ठहराकर डिब्बे में बंद किया जा चुका था। निर्देशक तिग्मांशु धूलिया अंतिम उम्मीद हारकर अब नए काम की तलाश में थे अौर नायक इरफ़ान, फिल्म के लेखक संजय चौहान के शब्दों ...

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April 1, 2013

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अपने अपने रिचर्ड पारकर

कुछ महीने पहले 'चकमक' के दोस्तों के लिए यह परिचय लिखा था 'Life Of Pi' किताब/ फिल्म का. साथ ही किताब से मेरा पसन्दीदा अंश, यात्रा बुक्स द्वारा प्रकाशित किताब के हिन्दी अनुवाद 'पाई पटेल की अजब दास्तान' से साभार यहाँ. पिछले दिनों जब लंदन से लौटी हमारी दोस्त हमारे लिए ...

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March 13, 2013

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यथार्थ की उलटबांसियाँ : मटरू की बिजली का मंडोला

" बड़ी प्रार्थना होती है। जमाखोर अौर मुना़फाखोर साल-भर अनुष्ठान कराते हैं। स्मगलर महाकाल को नरमुण्ड भेंट करता है। इंजीनियर की पत्नी भजन गाती हैं - 'प्रभु कष्ट हरो सबका'। भगवन्‌, पिछले साल अकाल पड़ा था तब सक्सेना अौर राठौर को अापने राहत कार्य दिलवा दिया था। प्रभो, इस साल ...

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January 21, 2013

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नाम-पते वाला सिनेमा : 2012 Roundup

फिर एक नया साल दरवाज़े पर है अौर हम इस तलाश में सिर भिड़ाए बैठे हैं कि इस बीते साल में 'नया' क्या समेटें जिसे अागे साथ ले जाना ज़रूरी लगे। फिर उस सदा उपस्थित सवाल का सामना कि अाखिर हमारे मुख्यधारा सिनेमा में क्या बदला? क्या कथा बदली? इसका शायद ...

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January 2, 2013

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केंचुल उतारता शहर

हंसल मेहता वापस अाए हैं बड़े दिनों बाद। अपनी नई फ़िल्म 'शाहिद' के साथ, जिसकी तारीफें फ़िल्म समारोहों में देखनेवाले पहले दर्शकों से लगातार सुनने को मिल रही हैं। उनकी साल 2000 में बनाई फ़िल्म 'दिल पे मत ले यार' पर कुछ साल पहले दोस्त अविनाश के एक नए मंसूबे ...

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December 21, 2012

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कितने बाजू, कितने सर

एमए के दिनों की बात है। हम देश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय में थे और यहाँ छात्रसंघ चुनावों में वाम राजनीति को फिर से खड़ा करने की एक और असफ़ल कोशिश कर रहे थे। उन्हीं दिनों पंजाब से आए उन साथियों से मुलाकात हुई थी। हिन्दी में कम, पंजाबी में ...

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November 30, 2012

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’आई एम 24’ और सौरभ शुक्ला का लेखक अवतार

पिछले दिनों रिलीज़ हुई ‘आई एम 24’ पुरानी फ़िल्म है। लेकिन इसके बहाने मैं पुन: दोहराता हूँ उस व्यक्ति के काम को जिसने कभी अनुराग कश्यप के साथ मिलकर ’सत्या’ लिखी थी और हमारे सिनेमा को सिरे से बदल दिया था। न जाने क्या हुआ कि हमने उसके बाद सौरभ ...

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October 22, 2012