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सिनेमा के सौ बरस

हिन्दी सिनेमा आधुनिक भारत का सबसे प्यारा बच्चा है. उसमें आपको खिलखिलाकर हंसाने की क्षमता है तो गहरे प्यार से निकली एक पल में रुला देने वाली कुव्वत भी. और आनेवाली मई में हम इसके जन्म के सौवें साल में प्रवेश कर जायेंगे. दादासाहेब फ़ालके से दिबाकर बनर्जी तक, कैसा ...

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April 22, 2012

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मेरी शुभकामनाएं ’ब्लैक स्वॉन’ के साथ हैं, उम्मीदें भी.

एक और सोमवार सुबह का जागना, एक और ऑस्कर की रात का इंतज़ार. उस सितारों भरी रात से पहले उन फ़िल्मों की बातें जिनका नाम उस जगमगाती रात बार-बार आपकी ज़बान पर आना है. पेश हैं इस साल ऑस्कर की सरताज पाँच ख़ास फ़िल्में मेरी नज़र से. 1.   दि किंग्स स्पीच इस ...

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February 28, 2011

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हिन्दी सिनेमा इतिहास की पंद्रह सर्वश्रेष्ठ हास्य फ़िल्में

व्यंग्य हिन्दी सिनेमा का मूल स्वर नहीं रहा है. इसीलिए हजारों फ़िल्मों लम्बे इस सिनेमाई सफ़र में बेहतरीन कहे जा सकने लायक सटायर कम ही बने हैं. फिर भी हिन्दी सिनेमा ने समय-समय पर कई अच्छी कॉमेडी फ़िल्में दी हैं जिन्हें आज भी देखा पसंद किया जाता ...

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December 7, 2010

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फ़िल्म की सफ़लता को हम कैसे आँकें?

अभिनव कश्यप की सलमान ख़ान स्टारर ’दबंग’ की रिकॉर्डतोड़ बॉक्स-ऑफ़िस सफ़लता की ख़बरों के बीच यह सवाल अचानक फिर प्रासंगिक हो उठा है कि आखिर किसे हम ’सुपरहिट फ़िल्म’ कहें? बाज़ार में खबरें हैं कि ’दबंग’ ने ’थ्री ईडियट्स’ के कमाई के रिकॉर्ड्स को भी पीछे छोड़ दिया है और ...

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September 29, 2010

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अच्छे संगीत और उसके कद्रदान के बीच अब कोई नहीं

इंडियन ओशियन हिन्दुस्तान का नामी-गिरामी म्यूजिक बैंड है. न सिर्फ़ नामी-गिरामी, इसके संगीत की विविधता इसे हिन्दुस्तान जैसे महादेश का प्रतिनिधि चरित्र भी बनाती है. इनके संगीत में ठेठ राजस्थानी लोकसंगीत की खनक है तो कश्मीर की ज़मीन से आए बोलों की गमक भी. इनके गीतों में कबीर की उलटबांसियाँ ...

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September 16, 2010

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सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

शाहरुख़ ख़ान और अक्षय कुमार जैसे बड़े सितारों को ’आम आदमी’ कहकर देखते-दिखाते हिन्दी सिनेमा में बरस बीते. इन्हीं सितारों की चकाचौंध में पहले हिन्दी सिनेमा से गाँव गायब हुआ और उसके साथ ही खेती-किसानी की तमाम बातें. मल्टीप्लैक्स के आगमन के साथ सिनेमा देखने के दाम इतने बढ़े कि ...

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August 24, 2010

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सात फ़िल्में, सात संस्कार

सिनेमा सिर्फ़ मनोरंजन का ही माध्यम नहीं. अपनी हरदिल अज़ीज़ कहानियों की बेपरवाह हंसी-ठिठोली के बीच यह देखने वाले के मन में कहीं गहरे कोई विचार छोड़ जाता है. और बहुत बार ऐसा भी हुआ है कि समाज के एक बड़े हिस्से में किसी फ़िल्म का कोई एक ही प्रसंग, ...

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July 10, 2010

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परदे पर प्यार के यादगार लम्हें

हर दौर की अपनी एक प्रेम कहानी होती है. और हमें वे प्रेम कहानियाँ हमारी फ़िल्मों ने दी हैं. अगर मेरे पिता में थोड़े से ’बरसात की रात’ के भारत भूषण बसते हैं तो मेरे भीतर ’कभी हाँ कभी ना’ के शाहरुख़ की उलझन दिखाई देगी. हमने अपने नायक हमेशा ...

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February 15, 2010