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देवदास को आईना दिखाती चंदा और पारो : साल दो हज़ार नौ में हिन्दी सिनेमा

महीना था जनवरी का और तारीख़ थी उनत्तीस. ’तहलका’ से मेरे पास फ़ोन आया. तक़रीबन एक हफ़्ता पहले मैंने उन्हें अपने ब्लॉग का यूआरएल मेल किया था. ’आप हमारे लिए सिनेमा पर लिखें’. ’क्या’ के जवाब में तय हुआ कि कल शुक्रवार है, देखें कौनसी फ़िल्म प्रदर्शित होने वाली है. ...

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January 20, 2010

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ख़ामोशी के उस पार : विदेश

मूलत: तहलका समाचार के फ़िल्म समीक्षा खंड ’पिक्चर हॉल’ में प्रकाशित ********** दीपा मेहता की ’विदेश’ परेशान करती है, बेचैन करती है. यह देखने वाले के लिए एक मुश्किल अनुभव है. कई जगहों पर यंत्रणादायक. इतना असहनीय कि आसान रास्ता है इसे एक ’बे-सिर-पैर’ की कहानी कहकर नकार देना. यह ज़िन्दगी की ...

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April 4, 2009

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सिद्धार्थ- द प्रिजनर : महानगरीय सांचे में ढली नीतिकथा

मूलत: तहलका समाचार के फ़िल्म समीक्षा खंड ’पिक्चर हॉल’ में प्रकाशित ***** बचपन में पंचतंत्र और हितोपदेश की कहानियाँ सुनकर बड़ी हुई हिन्दुस्तान की जनता के लिए ’सिद्दार्थ, द प्रिज़नर’ की कहानी अपरिचित नहीं है. सोने का अंडा देने वाली मुर्गी और व्यापारी की कहानी के ज़रिये ’लालच बुरी बला है’ का ...

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March 4, 2009

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बिल्लू: अब फिर से राज कपूर नहीं

मूलत: तहलका समाचार के फ़िल्म समीक्षा खंड ’पिक्चर हॉल’ में प्रकाशित ***** बहुत दिन हुए देखता हूँ कि हमारे मनमोहन सिंह जी की सरकार अपना हर काम किसी ’आम आदमी’ के लिए करती है. मैं देखता कि जब विदर्भ में किसान आत्महत्या कर रहे हैं, गुजरात से कर्नाटक तक अल्पसंख्यकों को छांट-छांट ...

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February 18, 2009

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लक बाय चांस: उड़ती तितली को पकड़ने की कोशिश

मूलत: तहलका हिन्दी के फ़िल्म समीक्षा खंड ’पिक्चर हॉल’ में प्रकाशित * * * * * * * * * * * * * "यह बॉलीवुड का असल चेहरा है. ’लक बाय चांस’ हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री के लिए वही है जो ’सत्या’ मुम्बई अन्डरवर्ल्ड के लिए थी." - ’पैशन फ़ॉर सिनेमा’ ...

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February 9, 2009