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सात फ़िल्में, सात संस्कार

सिनेमा सिर्फ़ मनोरंजन का ही माध्यम नहीं. अपनी हरदिल अज़ीज़ कहानियों की बेपरवाह हंसी-ठिठोली के बीच यह देखने वाले के मन में कहीं गहरे कोई विचार छोड़ जाता है. और बहुत बार ऐसा भी हुआ है कि समाज के एक बड़े हिस्से में किसी फ़िल्म का कोई एक ही प्रसंग, ...

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July 10, 2010

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राँझा राँझा

प्रायद्वीपीय भारत को पछाड़ती, दक्षिण से उत्तर की ओर भागती एक रेलगाड़ी में गुलज़ार  द्वारा फ़िल्म  ’रावण’ के लिए लिखा गीत ’राँझा राँझा’ सुनते हुए... बड़ा मज़ेदार किस्सा है... शुरुआती आलाप में कहीं गहरे महिला स्वर की गूँज है. और बहती हवाओं की सनसनाहट भी जैसे स्त्री रूपा है. रेखा अपनी आवाज़ ...

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June 17, 2010

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हवा में उड़ता जाए रे… ’अप’

यहाँ कुछ देर से लगा रहा हूँ. जैसा अब आपमें से बहुत लोग जानते हैं, यह लेख ’चकमक’ के बच्चों से मुख़ातिब है. ***** एक फ़िल्म थी पुरानी. नाम था मि. इंडिया. शायद देखी हो तुमने भी. मुझे बहुत पसंद है वो फ़िल्म. उसके कई मज़ेदार किस्सों में से एक मज़ेदार किस्सा ...

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June 3, 2010

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बुला रहा है कोई मुझको, लुभा रहा है कोई.

बात पुरानी है, नब्बे का दशक अपने मुहाने पर था. अपने स्कूल के आख़िरी सालों में पढ़ने वाला एक लड़का राजस्थान के एक छोटे से कस्बे में कैसेट रिकार्ड करने की दुकान खोलकर बैठे दुकानदार से कुछ अजीब अजीब से नामों वाले गाने माँगा करता. जो उम्मीद के मुताबिक उसे ...

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April 4, 2010

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Things we lost in the fire

’आश्विट्ज़ के बाद कविता संभव नहीं है.’ - थियोडोर अडोर्नो. जर्मन दार्शनिक थियोडोर अडोर्नो ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इन शब्दों में अपने समय के त्रास को अभिव्यक्ति दी थी. जिस मासूमियत को लव, सेक्स और धोखा की उस पहली कहानी में राहुल और श्रुति की मौत के साथ हमने ...

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March 27, 2010

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इस रात की सुबह नहीं

’लव, सेक्स और धोखा’ पर व्यवस्थित रूप से कुछ भी लिख पाना असंभव है. बिखरा हुआ हूँ, बिखरे ख्यालातों को यूं ही समेटता रहूँगा अलग-अलग कथा शैलियों में. सच्चाई सही नहीं जाती, कही कैसे जाए. मैं नर्क में हूँ. यू कांट डू दिस टू मी. हाउ कैन यू शो थिंग्स लाइक दैट ...

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March 23, 2010

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ऑस्कर 2010 : क्या ’डिस्ट्रिक्ट 9′ सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म कहलाने की हक़दार नहीं है?

यह ऑस्कर भविष्यवाणियाँ नहीं हैं. सभी को मालूम है कि इस बार के ऑस्कर जेम्स कैमेरून द्वारा रचे जादुई सफ़रनामे ’अवतार’ और कैथेरीन बिग्लोव की युद्ध-कथा ’दि हर्ट लॉकर’ के बीच बँटने वाले हैं. मालूम है कि मेरी पसन्दीदा फ़िल्म ’डिस्ट्रिक्ट 9’ को शायद एक पुरस्कार तक न मिले. लेकिन ...

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March 7, 2010

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परदे पर प्यार के यादगार लम्हें

हर दौर की अपनी एक प्रेम कहानी होती है. और हमें वे प्रेम कहानियाँ हमारी फ़िल्मों ने दी हैं. अगर मेरे पिता में थोड़े से ’बरसात की रात’ के भारत भूषण बसते हैं तो मेरे भीतर ’कभी हाँ कभी ना’ के शाहरुख़ की उलझन दिखाई देगी. हमने अपने नायक हमेशा ...

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February 15, 2010

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बंजारा नमक लाया

प्रभात की कविताओं की नई किताब ’बंजारा नमक लाया’ आई है. प्रभात हमारा दोस्त है. प्रभात की कविताएं हमारी साँझी थाती हैं. हम सबके लिए ख़ास हैं. कल पुस्तक मेले में ’एकलव्य’ पर उसकी नई किताब मिली तो मैं चहक उठा. आप भी पढ़ें इन कविताओं को, इनका स्वाद लें. मैं ...

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February 6, 2010

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हरिश्चंद्राची फैक्टरी

यह आलेख ’चकमक’ के बच्चों से मुख़ातिब है. इस बार फिर शुरुआत एक सवाल से करते हैं. अगर तुम्हें एक मूवी कैमरा (जिससे फ़िल्म बनाई जाती है) मिल जाये और उसके साथ यह छूट भी कि तुम किसी एक चीज़ का वीडियो बना सकते हो तो बताओ तुम किसका वीडियो बनाओगे? अच्छा ...

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January 30, 2010