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परदे पर प्यार के यादगार लम्हें

हर दौर की अपनी एक प्रेम कहानी होती है. और हमें वे प्रेम कहानियाँ हमारी फ़िल्मों ने दी हैं. अगर मेरे पिता में थोड़े से ’बरसात की रात’ के भारत भूषण बसते हैं तो मेरे भीतर ’कभी हाँ कभी ना’ के शाहरुख़ की उलझन दिखाई देगी. हमने अपने नायक हमेशा ...

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February 15, 2010

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बंजारा नमक लाया

प्रभात की कविताओं की नई किताब ’बंजारा नमक लाया’ आई है. प्रभात हमारा दोस्त है. प्रभात की कविताएं हमारी साँझी थाती हैं. हम सबके लिए ख़ास हैं. कल पुस्तक मेले में ’एकलव्य’ पर उसकी नई किताब मिली तो मैं चहक उठा. आप भी पढ़ें इन कविताओं को, इनका स्वाद लें. मैं ...

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February 6, 2010