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सारे शहर की जगमग के भीतर है अँधेरा

बहुत दिनों बाद थियेटर में अकेले कोई फ़िल्म देखी. बहुत दिनों बाद थियेटर में रोया. बहुत दिनों बाद यूँ अकेले घूमने का मन हुआ. बहुत दिनों बाद लगा कि जिन्हें प्यार करता हूँ उन्हें जाकर यह कह दूँ कि मैं उनके बिना नहीं रह पाता. माँ की बहुत याद आयी. ...

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November 20, 2008

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हम बड़े हुए, शहर बदल गए…

तुम अपने अकेलेपन की कहानियाँ कहो. तुम अपने डर को बयान करो. तुम अपने दुःख को किस्सों में गढ़ कर पेश करो. दुनिया यूँ सुनेगी जैसे ये उनकी ही कहानी है. हर लेखक हरबार अपनी ही कहानी कहता है. कथा और इतर-कथा तो बस बात कहने के अलग अलग रूप ...

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November 5, 2008